अब पाकिस्तान का यह इलाका बना उनकी शरणस्थली
नमस्ते ! मेरा नाम खुशबू है आशा करती हूँ आप लोग ठीक होंगे!
भारतीय सेना की बहादुरी और सटीक योजना की बदौलत किए गए ‘सिंदूर ऑपरेशन’ ने न सिर्फ आतंकवादी संगठनों की कमर तोड़ दी, बल्कि उनके दिलों में एक ऐसा डर बैठा दिया है जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। यह ऑपरेशन सुरक्षा बलों की सूझबूझ और जांबाजों की शहादत का एक ऐसा अध्याय है जिसने आतंक के खिलाफ जंग की तस्वीर ही बदल कर रख दी।
सिंदूर ऑपरेशन भारतीय सेना की एक साहसिक और सटीक कार्रवाई थी। इसकी सफलता ने आतंकी नेताओं और उनके ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे आतंकी संगठनों का मनोबल गहरा गया। सेना के कमांडोज ने दुश्मन के घर में घुसकर जो हिम्मत दिखाई, वह दुनिया भर की सेनाओं के लिए मिसाल बन गई।
आतंकियों पर क्या गुजरी?
सिंदूर ऑपरेशन के बाद आतंकी संगठनों में खलबली मच गई। उन्हें अहसास हो गया कि अब उनके so-called ‘सुरक्षित ठिकाने’ भी भारतीय सुरक्षा बलों की पहुंच से बाहर नहीं हैं। इस ऑपरेशन ने उनकी नसों में डर का जहर भर दिया। वे हमेशा इस डर से सहमे रहने लगे कि कब कोई कमांडो उनके सामने आ सकता है।
अब पाकिस्तान का कौन-सा इलाका बना है उनकी पनाह?
आतंकियों का यह डर उन्हें भारतीय सीमा से दूर, पाकिस्तान के भीतरी इलाकों में जाने पर मजबूर कर रहा है। खासतौर पर पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) के दूरदराज और पहाड़ी इलाके अब उनकी पसंदीदा शरणस्थली बनते जा रहे हैं। ये इलाके न सिर्फ भौगोलिक रूप से दुर्गम हैं, बल्कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सक्रिय मदद से यहाँ उन्हें छिपने और अपनी गतिविधियों को चलाने में आसानी होती है।
हालांकि, भारतीय खुफिया एजेंसियों की नजर अब भी इन्हीं इलाकों पर टिकी हुई है। सेना की तैयारियां और सतर्कता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है।
निष्कर्ष: डर अब उनकी नियति है
सिंदूर ऑपरेशन ने एक स्पष्ट संदेश दे दिया है – भारत आतंकवाद के खिलाफ जंग में कोई भी कीमत चुकाने को तैयार है। आतंकी चाहे जहाँ भी छिपें, उन्हें हमेशा इस बात का डर सताता रहेगा कि भारत का कोई कमांडो किसी भी पल उनके सामने आ सकता है। यह डर ही उनकी सबसे बड़ी हार है, और यही भारत की सबसे बड़ी जीत।
जय हिन्द! जय भारत!