मैं, एक आम पाठक और प्रेरणा खोजने वाला इंसान, आज आपको एक ऐसी बेटी की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसने यह साबित कर दिया कि यदि आत्मविश्वास और मेहनत साथ हो तो कोई बाधा रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती।
दिल्ली की यह बेटी जन्म से दृष्टिबाधित है, लेकिन उसकी सोच और हौसले की उड़ान आसमान से भी ऊँची है। उसने अपने जीवन में कभी हार मानना नहीं सीखा। ज्ञान की ताकत से वह पहले कौन बनेगा करोड़पति जैसे प्रतिष्ठित मंच तक पहुँची और वहाँ अपनी बुद्धिमत्ता से सबका दिल जीत लिया। लेकिन उसका सपना यहीं नहीं रुका।
उसने ठान लिया था कि समाज की सेवा करनी है और देश के लिए कुछ बड़ा करना है। यही सोच उसे UPSC की कठिन परीक्षा की ओर ले गई। कहते हैं, UPSC का सफर हजारों-लाखों युवाओं के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इस बेटी ने अपनी दृष्टिहीनता को कमजोरी नहीं बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। परिणाम सामने आया—उसने UPSC परीक्षा में टॉप कर दिखाया और पूरे देश को गौरवान्वित किया।
यह कहानी सिर्फ एक लड़की की नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए संदेश है जो अपनी परिस्थितियों से हार मान जाते हैं। यह बताती है कि असली जीत आँखों से नहीं, बल्कि दृष्टि और संकल्प से मिलती है।
मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि यह बेटी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उसने यह सिद्ध कर दिया कि अगर नज़र कमजोर भी हो, तो भी नज़रिया मजबूत होना चाहिए।
लेखक: एक प्रेरित पाठक