लखनऊ, 19 सितंबर 2025
उत्तर प्रदेश में केले की कीमतों में हाल ही में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर लेकर आई है। हालांकि, यह स्थिति केला उत्पादक किसानों के लिए चुनौतियां भी पेश कर रही है। हाल के बाजार आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न मंडियों में केले की औसत कीमत ₹3061.63 प्रति क्विंटल दर्ज की गई है, जो कुछ महीने पहले की तुलना में काफी कम है। कुछ क्षेत्रों में कीमतें ₹700 से ₹800 प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं।
कीमतों में गिरावट के कारण
कई कारकों ने मिलकर इस मूल्य गिरावट को प्रभावित किया है। भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति ने उत्तर भारत में केले की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। नांदेड़ जिले के किसानों ने बताया कि भारी बारिश के कारण उनकी फसल को नुकसान पहुंचा, जिसके चलते उन्हें स्थानीय बाजारों में कम कीमतों पर केले बेचने पड़े। इसके अलावा, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी प्राकृतिक आपदाओं ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, जिससे आपूर्ति बढ़ी और कीमतें कम हुईं।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के तालिबपुर सरैला गांव में किसानों ने बताया कि व्यापारी कम कीमतों पर केले खरीदने को तैयार नहीं हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है। एक स्थानीय किसान, राम प्रसाद, ने कहा, “हमारी मेहनत और लागत की तुलना में हमें बहुत कम दाम मिल रहे हैं। बाजार में मांग है, लेकिन व्यापारी कम कीमत दे रहे हैं।”
उपभोक्ताओं के लिए राहत
उपभोक्ताओं के लिए यह गिरावट एक सकारात्मक खबर है। लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों में खुदरा बाजारों में केले की कीमतें ₹10 से ₹24 प्रति किलोग्राम तक देखी गई हैं। यह उन परिवारों के लिए राहत की बात है जो अपने दैनिक आहार में केले को शामिल करते हैं। लखनऊ की एक गृहिणी, शालिनी सिंह, ने बताया, “पहले केले ₹40-50 प्रति किलोग्राम तक थे, लेकिन अब हम इन्हें आधे दाम में खरीद पा रहे हैं। यह हमारे घरेलू बजट के लिए अच्छा है।”
किसानों के लिए चुनौतियां
हालांकि उपभोक्ताओं को लाभ हो रहा है, लेकिन किसानों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को किसानों की सहायता के लिए कदम उठाने चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले भी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा की है, और अब इस स्थिति में भी इसी तरह के समर्थन की जरूरत है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अनिल वर्मा ने सुझाव दिया, “सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत केले को शामिल करने पर विचार करना चाहिए। साथ ही, किसानों को वैकल्पिक बाजारों तक पहुंच प्रदान करने के लिए कोल्ड स्टोरेज और परिवहन सुविधाओं को बढ़ावा देना चाहिए।”
भविष्य की संभावनाएं
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति स्थिर रही तो आपूर्ति और मांग में संतुलन बन सकता है, जिससे कीमतें स्थिर हो सकती हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में केले की नई फसलें जल्द ही बाजार में आएंगी, जिससे कीमतों पर और प्रभाव पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश, जो भारत में केले का एक प्रमुख उत्पादक राज्य है, में यह स्थिति न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन रही है। सरकार और किसानों को मिलकर इस चुनौती का सामना करने की जरूरत है ताकि उपभोक्ताओं को सस्ते दामों पर केले मिलते रहें और किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त हो।
स्रोत:
- CommodityOnline.com, 18 सितंबर 2025
- Dainik Bhaskar, 8 सितंबर 2025
- Free Press Journal, 17 सितंबर 2025